पानी की बचत से ही भावी पीढी का विकास संभव : प्रो ढिंढसा

भारत नमन ब्यूरो /हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के सभागार में विगत दो दिनों से चल रही नेशनल कांफ्रेंस का समापन हुआ। समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो0 के0एस0 ढिंढसा ने कहा कि ग्रामीण विकास तथा कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था के दो मजबूत स्तम्भ है। इन दोनों स्तम्भों को वातावरणीय परिवर्तन सर्वाधिक प्रभावित करता है। उन्होंने नीति आयोग 2020 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वातावरणीय परिवर्तन में एक ओर जहां ग्लोबल की अर्थव्यव्स्था पर प्रभाव डाला है वहीं इस वातावरणीय परिवर्तन से भारतीय कृषि तथा ग्रामीण विकास सीधा प्रभावित होता है क्योंकि 0.5 डिग्री तापमान की अधिकता भी गेहूं तथा चावल की फसल को प्रभावित करती है, जिससे भारतीय आबादी सीधी प्रभावित होती है। उन्होंने वल्र्ड बैंक की रिपोर्ट के माध्यम से कहा कि आज पानी की जरूरत जिस कदर बढ़ती जा रही है, उसी अनुपात में इसके स्रोतों की कमी होती जा रही है। इसलिए पानी की बचत के लिए हमें आज ही सजग होना पड़ेगा। तभी भावी पीढ़ी के विकास को सुनिश्चित किया जा सकता है।            कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 रूपकिशोर शास्त्री ने आयोजन में भाग लेने आए देश के विभिन्न राज्यों के वैज्ञानिकों व शोध छात्रों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दो दिनों तक चले इस वैज्ञानिक शोध ज्ञान गंगा में आपने जो ज्ञान का मंथन किया है उससे निकलने वाला अमृत निश्चय ही राष्ट्र व राष्ट्र के ग्रामीण परिवेश में निवास करने वाली जनता के लिए मील का पत्थर साबित होगा। दो दिनों तक चले इस सम्मेलन से आप एक नई ऊर्जा का संचार अपने अन्दर महसूस कर अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर शोध के कार्यो में नए मानक स्थापित करेंगे। कांफ्रेंस को सम्बोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि हेमवती नन्दन गढ़वाल वि0वि0 के पूर्व कुलपति प्रो0 एम0एस0 रावत ने कहा कि आज हमें भविष्य में विज्ञान की परम्पराओं को किस प्रकार से संचालित करना है इसके लिए नई पीढ़ी को व्यवस्थित करना होगा। पाण्डिचेरी वि0वि0 के निदेशक प्रो0 राजीव जैन कहा कि युवा वैज्ञानिक अपने अनुसंधान विषयों में और अधिक विश्वसनियता व प्रमाणिकता लाने के लिए अपने प्राचीन सांस्कृति एवं वेद का अध्ययन भी करना चाहिए, जिससे कि वेद व प्राचीन ग्रन्थों की प्राचीन प्रमाणिकता व गुणवत्ता का लाभ आधुनिक विज्ञान के क्षेत्र में और अधिक प्रमाणिकता से लिया जा सके। पूर्णिया वि0वि0, बिहार के उप कुलपति प्रो0 आर0एन0 यादव ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था का मूल आधार कृषि है। हमारे देश की जनसंख्या का एक बड़ा भाग ग्रामीण परिवेश में रहकर अपनी आजीविका को खेती के माध्यम से आगे बढ़ता है। आज जहां विभिन्न क्षेत्रों में बहुत तेजी से उन्नति के आयाम स्थापित हुए हे वहीं हमें ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाली एक बड़ी आबादी किसानों की आय को बढ़ाने की दिशा में अनुसंधान करने की आवश्यकता है।  कांफ्रेस चेयर प्रो0 आर0डी0 कौशिक ने कहा कि हरिद्वार चैप्टर निरन्तर विज्ञान के क्षेत्र में शोध कार्यो को गति देने की दिशा में अग्रसर है। काफ्रेंस के संयोजक प्रो0 एल0पी0 पुरोहित ने बताया कि इस दो दिवसीय कांफ्रेस में 250 से अधिक प्रतिभागियों ने विभिन्न 11 सत्रों में अपने शोध पत्रों के माध्यम से आधुनिक विज्ञान की प्रगति पर प्रकाश डाला, तथा पोस्टर के माध्यम से अपने शोध पत्रों को प्रस्तुत किया, जिसमें प्रथम पुरस्कार जम्मू वि0वि0 की अनुराधा, द्वितीय पुरस्कार चैधरी चरण सिंह वि0वि0 की आकांक्षा, तृतीय पुरस्कार गु0कां0वि0वि0 के गौरव उपाध्याय को पुरस्कार के रूप में प्रशस्ति पत्र एवं समृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कांफ्रेंस में आए प्रतिभागी ताहिरा फिरदौस(जम्मू) तथा अशोक कुमार (लखनऊ) ने मंच से अपने अनुभवों को साझा करते हुए इसे एक सफल एवं प्रेरणादायक आयोजन बताया। इस अवसर पर प्रो0 राजेन्द्र अग्रवाल, प्रो0 प्रभात कुमार, प्रो0 वी0के0 सिंह, प्रो0 आर0के0 सोनी, प्रो0 एम0पी0 डोभाल, प्रो0 एस0पी0 खटटर, प्रो0 अरूण रावत, डा0 हरीश मुदगील, डा0 सतपाल बदसारा, प्रो0 अनीता तोमर, डा0 एम0एम0 तिवारी, डा0 लोकेश जोशी, प्रो0 पी0पी0 पाठक, डा0 मयंक अग्रवाल, डा0 अंजली गोयल, डा0 मनीला, नमिता खण्डुजा, डा0 उमेश गैरोला, डा0 सत्यनारायण, डा0 राजुल भारद्वाज, डा0 पवन कुमार, डा0 विनोद, डा0 पंकज पाल, डा0 विपिन, विकास देशवाल, राजीव त्यागी, डा0 अजय मलिक, डा0 शिवकुमार चैहान, डा0 पंकज कौशिक, कुलभूषण शर्मा, सुनील कुमार, हेमन्त सिंह नेगी इत्यादि उपस्थित रहे। 


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