ऋषिकेश रेलवे स्टेशन का नाम उर्दू में लिखा गया तो मेयर करेंगी विरोध

जिलाधिकारी को पत्र लिखकर राज्य की द्वितीय भाषा में संस्कृत में लिखने की मांग


एसके विरमानी /ऋषिकेश | नगर निगम महापौर अनिता ममगाई ने कहा कि योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन का नाम उत्तराखंड की द्वितीय भाषा संस्कृत के बजाय उर्दू में लिखा गया तो वह इसका पुरजोर विरोध करेंगी। जरूरत पड़ी तो इसके लिए वह जन आंदोलन से भी पीछे नही हटेंगी। महापौर ने बताया कि रेलवे के गजट में स्पष्ट तौर पर जानकारी दी गई है कि हिंदी अंग्रेजी के अलावा जिस शहर में रेलवे स्टेशन का नाम लिखा जाना है वहां की क्षेत्रीय भाषा को प्राथमिकता दी जाए। देहरादून के नये  रेलवे स्टेशन मैं भी उर्दू के बजाय  संस्कृत भाषा का प्रयोग किया गया है। इस बाबत जिला अधिकारी को एक पत्र प्रेषित कर रेलवे के गजट की जानकारी दी गई हैंं। जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि रेलवे स्टेशन के नाम पर क्षेत्रीय भाषा को तवज्जो दी जाए। बताया कि,गजट में स्पष्ट उल्लेख है कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों के रेलवे स्टेशनों में ही तृतीय भाषा के रूप में उर्दू शब्द का उपयोग किया जाना है। उन्होंने कहां की विश्व प्रसिद्ध चार धाम यात्रा का मुख्य द्वार होने की वजह से करोड़ों हिंदुओं की आस्था का तीर्थ नगरी प्रमुख केन्द्र है। देवभूमि के निर्माणाधीन रेलवे स्टेशन में उर्दू का उपयोग कहीं से भी  तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने चेताया कि संस्कृत भाषा की उपेक्षा की गई तो वह क्षेत्रीय जनता को साथ लेकर आंदोलन के लिए बाध्य होंगी।


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