संत रविदास ने आडंबरवाद,पाखंडवाद और छुआछूत का आजीवन विरोध किया: हरीश रावत

भारत  नमन ब्यूरो /हरिद्वार। संत शिरोमणि गुरु रविदास को शिरोमणि की उपाधि ऐसे ही नहीं मिली। बल्कि इसलिए मिली कि उन्होंने आज से सैंकड़ो वर्ष पूर्व संकीर्णवादी सोच का डटकर मुकाबला किया। संत रविदास ने आडंबरवाद व पाखंडवाद का विरोध करते हुए मानव मानव में फैली छुआछूत का आजीवन विरोध किया। ये विचार कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, असम के प्रभारी व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने व्यक्त किये। वे रविवार को रविदास जयंती के अवसर पर ग्राम ब्रह्मपुरी में संत रविदास मंदिर के जीर्णोद्धार कार्यक्रम में बतौर मुख्यमंत्री अतिथि बोल रहें थे। ब्रह्मपुरी में अम्बेडकर चौक पर उन्होंने सबसे पहले डा.अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने कहा कि संत तो बहुत हुए हैं। लेकिन संतो में गुरु रविदास बहुत बड़े और सच्चे संत हुए हैं। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजक व जिला पंचायत कोटे से रविदास मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए किये गए कार्य के लिए जिला पंचायत सदस्य रोशनलाल का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के आयोजक जिला पंचायत सदस्य रोशनलाल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उन्हें फक्र है कि वे स्व ब्रह्मानंद के पुत्र हैं तथा उनके द्वारा बताये रास्ते पर चलकर समाज की सेवा करने का मौका मिल रहा है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष राव आफाक अली ने गुरु रविदास को महान संत बताते हुए कहा कि संत रविदास ने उन लोगों का विरोध कर मानवता की लड़ाई लड़ी। युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अमरदीप रोशन व ब्रह्मपुरी के पूर्व प्रधान तेलूराम ने भी युवाओं को संत रविदास के विचारो पर चलने के लिए प्रेरित किया। पूर्व महिला आयोग उत्तराखंड की अध्यक्ष संतोष चैहान ने संत रविदास को एक सच्चा व महान संत बताया। कार्यक्रम का संचालन तीर्थपाल रवि ने किया। इस अवसर पर रविदास मंदिर समिति के अध्यक्ष विजेंद्र कटारिया, दर्शन लाल, बीएस तेजियान, राजबीर चौहान, निर्मल सिंह, मास्टर रामपाल, वेदपाल, चीफ मेहर सिंह, अनिल सैनी, बीना कपूर, सुष्मिता पंत, कैलाश चंद्र, अंजू द्विवेदी, पूर्व प्रधान सत्यपाल सिंह, टिंकू ठेकेदार, ताहिर हसन, सुदेश, विनोद तोमर, रिंकू, मुकेश, नेपाल सिंह व अनिल एडवोकेट आदि सहित सैंकड़ो लोग उपस्थित रहे।


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