स्वामी रामदेव और स्वामी चिदानंद ने इंडियन योग एसोसिएशन की बैठक में भाग लिया

एसके विरमानी /कोयंबटूर/ऋषिकेश | इंडियन योग एससिएशन एवं योग सर्टिफिकेशन बोर्ड की बैठक का आयोजन ईशा फाउंडेशन, कोयंबटूर में किया गया जिसमें योग गुरू स्वामी रामदेव  एवं परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज, ईशा फाउंडेशन के संस्थापक, सद्गुरू जग्गी वासुदेव ,  एस. व्यासा के कुलपति श्री नागेन्द्र , योग इंस्टिट्यूट डाॅ हंसा जयदेव , कैवल्य धाम, डाॅ ओ. पी. तिवारी  आर्ट आॅफ लिविंग कमलेश भार्नवाल, श्री रवि , फिट इंडिया की निदेशक एकता  तथा श्री श्री रविशंकर ने वीडियो कान्फ्रेन्स के माध्यम से, भारत के 10 योग एसोसिएशन के पदाधिकारी, मार्गदर्शन मण्डल, योग और अध्यात्म जगत की विशिष्ट अतिथियों ने सहभाग किया।


योग सर्टिफिकेशन बोर्ड की बैठक में भारत सरकार के आयूष विभाग के जाॅइट सेके्रटरी श्री पी. एन. रंजीत कुमार, यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स से श्री सिद्धार्थ सिंह ने भी सहभाग किया।
 ज्ञात हो कि इंडियन योग एसोसिएशन मार्गदर्शन मंडल में योग गुरू स्वामी रामदेव , सद्गुरू जग्गी वासुदेव , श्री श्री रविशंकर , स्वामी चिदानन्द सरस्वती , डाॅ प्रणव पाण्ड्या  एवं योग व अध्यात्म जगत की विशिष्ट गण सम्मिलित है।
  आज की बैठक में चर्चा हुई की योग एसोसिएशन का स्वतंत्र निकाय होना चाहिये जिसमें सरकार का सपोर्ट हो तथा जो संस्थायें दस वर्षो से अधिक समय से योग का प्रशिक्षण दे रही है एवं योग के प्रति जन मानस को जागृत कर रही है उन्हें योग के सम्बंध में फैसला लेने का स्वतंत्र अधिकार दिये जाने पर भी चर्चा हुई।
 सद्गुरू जग्गी वसुदेव  ने कहा कि सरकार को प्रमुख योग संस्थाओं को स्वतंत्र कर देना चाहिये ताकि वे वैश्विक स्तर पर भारतीय योग को प्रसारित कर सके। सरकार उन संस्थाओं को सुविधायें एवं सहयोग प्रदान करें तो बेहतर होगा।
 स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि यह योग ही है जिसने हम सभी को एक साथ लाया है और मैं भारतीय योग संस्थानों को एक साथ लाने के लिये भारत सरकार का समर्थन करता हूँ। उन्होने कहा कि यही वह संगम है जिसकी आज आवश्यकता है। स्वामी जी ने कहा कि दुनिया के लगभग सभी देशों से योग जिज्ञासुओं योग सीखने के लिये आते है भारत आते है परन्तु यह दुर्भाग्य है कि उन्हें हर तीन माह के बाद या तो श्रीलंका या काठमांडू, नेपाल या कहीं और जाना पड़ता है वीजा विस्तार के लिये। स्वामी जी ने कहा कि क्यो न यह व्यवस्था भारत में की जा जायें जिससे उनका समय और परेशानियां कम हो सके। दूसरी व्यवस्था यह भी की जा सकती है कि उन्हें योग वीजा, तीन माह, छः माह या एक वर्ष का भी प्रदान  किया जा सकता है। एक योग वीजा हो जिसके तहत वे सुविधापूर्वक भारत में रहकर योग की विशेष ट्रेनिंग ले सके तथा अपने देश जाकर योग का अभ्यास करे और दूसरों को भी करा सके। इससे वे बेहतर तरीके से भारतीय योग विधा को आगे प्रसारित कर सकते है इस पर ध्यान दिया जाना बहुत जरूरी है। इस बैठक में सहभाग करने आये अधिकारियों भी इस विषय में चर्चा की।
योगगुरू स्वामी रामदेव  ने कहा कि भारत की भूमि से योग सूर्य की किरणों का उदय हुआ है लेकिन योग, भारत सहित पूरी दुनिया के लिये है। उन्होने कहा कि हाँ भारत, योग का जन्मदाता है; योग का घर है। अब योग की गुणावत्ता और प्रामाणिकता की रक्षा करने का समय आ गया है भारत को इसके लिये आगे आना होगा।


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