'यज्ञ से हॄदय में सकारात्मक भाव उत्पन्न होते हैं'

वरिष्ठ संवाददाता /हरिद्वार। सकारात्मक भाव से ईश्वर, प्राकृतिक तत्वों से किए गए आह्वान से जीवन की प्रत्येक इच्छा पूरी होती है और यज्ञ योग की विधि है। जिससे शुद्धता व सकारात्मकता बढ़ती है। उक्त उद्गार स्वामी यज्ञनेश्वर रंगनाथ सेलुकर महाराज ने दूधाधारी चैक के समीप आयोजित महासोम यज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यज्ञ की उष्मा मनुष्य के अंतःकरण पर देवत्व की छाप डालती है। पूर्व पालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि यज्ञ से आत्मा में ब्रहामण तत्व व ऋषि तत्व की वृद्धि दिन प्रतिदिन होती है और आत्मा को परमात्मा से मिलाने का परम लक्ष्य बहुत सरल हो जाता है। म.म.स्वामी बलदेवानंद महाराज ने कहा कि यज्ञ हमारा सर्वोत्तम शिक्षक है। जो अपना आदर्श अपनी क्रिया से स्वयं ही प्रकट करता है। महासोम यज्ञ मानवता के कल्याण में अवश्य ही महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। यज्ञ में पधारे सभी संत महापुरूषों का यज्ञ की मुख्य यजमान मीनाक्षी देवी व सुरेश कुमार ने फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर स्वामी ऋषि रामकिशन, संत जगजीत सिंह, महंत सूरजदास, श्रीमहंत साधनानंद, महंत दुर्गादास, स्वामी अवधेशानंद, पहलवान बाबा, स्वामी जगदीशानंद, स्वामी शिवानन्द, महंत मोहन सिंह, महंत तीरथ सिंह, प्रवीण तपड़िया, सोमराज सेलुकर, श्रीकांत देशमुख, अनिकेत पाठक, सतीश, गोविंद झंवर, नंदकिशोर डार, स्वामी रविदेव शास्त्री, महंत सुमित दास, म.म.स्वामी अनन्तानन्द, स्वामी चिदविलासानंद, स्वामी दिनेश दास, राजमाता आशा भारती, स्वामी रामदेव पाठी आदि उपस्थित रहे।


टिप्पणियाँ