नवरात्र पर गीत

   मात पर्व


     


  सुशीला रोहिला, सोनीपत हरियाणा ।


   नवरात्रि पर्व मां का होता आह्वान 
  आओ सब मिल-जुल मनाए पर्व


  तूहि शैल्य,शारदा ,दुर्गा कमला, राज-राजेश्वरी ,
  अमृता आराध्य, मोहिना,सती मात भिवानी
  गृहलक्ष्मी, विदिशा , काली है  खपर वाली
  गले में नरमुण्डों की माला ,शेर की है सवारी


  अंधकार प्रकाश की एक किरण से हटता
  ज्ञान चक्षु से ही आत्मदीप जलता
   परम प्रकाश का चित्त में होता उजाला
   अन्तरजगत में ही शक्ति का है सहारा


  नवरात्रि पर्व की सीख है बड़ी महान
  सोच-समझ लो सब नर -नारी नादान
  जो माता को है पाना अन्तरजगत में जाना
   प्राणाक्षर के मध्य भृकुटी में धर ध्यान लगाना
    
   नवरात्रि पर्व का पुष्प जो चाहे खिलाना 
   मनमन्दिर में ही तुम ज्ञानदीप जलाना
   चेतन माता की करें हम सब पुजा 
    भारत माता को मिलकर विश्व गुरु बनाना


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