लाॕकडाउन में फंसे उत्तराखंड के प्रवासी लोगों को घर वापस लाने की व्यवस्था कराने की मांग

प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने राज्यपाल को भेजा पत्र


देहरादून | कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने राज्यपाल को पत्र भेजकर देश के विभिन्न राज्यों में प्रवास करने वाले संसाधनविहीन उत्तराखंड के लोगों को घर वापस लाने के लिए व्यवस्था कराने की मांग की है |


श्री बिष्ट ने राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा है कि उत्तराखंड राज्य में रोजगार की कम संभावनाओं के कारण राज्य के लाखों लोग उत्तराखंड से बाहर देश के विभिन्न राज्यों में रोजगार के लिए जाते हैं। इनमें से बहुत कम लोग ऐसे हैं जो सरकारी सेवाओं में हैं या स्थाई रोजगार पर हैं। अधिकांश लोग अल्प वेतनभोगी हैं, इनका रोजगार नितांत अस्थाई होने के कारण देश में लॉक डाउनलोड लागू होने के बाद से यह लोग एक माह से पूरी तरह से बेरोजगार हो गए हैं। इनमें से अधिकांश लोगों को मार्च माह का वेतन भी नहीं मिल पाया है। इनके पास रहने का अपना ठिकाना न होने के कारण इनको अनेक प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें से कई लोग ऐसे हैं जिनको मकान मालिक मकान खाली करने का दबाव बना रहे हैं। कुछ का अपना ठिकाना न होने के कारण अपने परिचितों के साथ एक कमरे में 8 से 10 या इससे अधिक संख्या में रहने को मजबूर हैं। कुछ लोगों के पास खाना बनाने के लिए बर्तन नहीं है तो कुछ के पास बर्तन व राशन खरीदने के लिए पैसे नहीं है। हालात यह हो गए हैं कि उत्तराखंड के लोगों की एक बड़ी संख्या इस स्थिति में है, जिनको सही तरीके से दो समय का भोजन उपलब्ध होना मुश्किल हो रहा है। 


कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की देखा देखी में उत्तराखंड सरकार ने कोटा राजस्थान में अध्ययनरत छात्रों को वापस उनके घर पहुंचाने का काम किया। वे इसके लिए सरकार का धन्यवाद ज्ञापित करते हैं इससे पहले हमारी सरकार ने गुजरात के अट्ठारह सौ लोगों को अपनी वोल्वो बसों से हरिद्वार से अहमदाबाद तक सकुशल पहुंचाने का काम किया। इसके अलावा ऋषिकेश से दो बार विदेशी नागरिकों को हमारी सरकार ने अपनी बसों पर दिल्ली पहुंचाया। भारत सरकार ने 273 भारतीयों को ईरान से एक चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली लाने के बाद उन्हें कश्मीर श्रीनगर में उनके घरों पर पहुंचा दिया है। इसके अलावा लॉक डाउन के दौरान साधन संपन्न लोगो के एक स्थान से दुसरे स्थानों में आने जाने के ऐसे कुछ और उदाहरण भी हैं। लॉक डाउन के दौरान राज्य की सरकारों ने तथा केंद्र सरकार ने जिन लोगों को अब तक एक राज्य से दूसरे राज्य में लाने ले जाने का काम किया या अनुमति दी वह सब साधन संपन्न एवं धनाढ्य वर्ग के लोग हैं, जबकि गरीब वर्ग, रहने खाने की दिक्कत वाले कामगार को ऐसी सुविधा तो बहुत दूर की बात है, उन लोगों को दो जून की रोटी के बारे में भी सरकार चिंता नहीं कर रही है,पूरे देश में ऐसा संदेश जा रहा है। केन्‍द्र  सरकार ने देश में एक निशान एक विधान का नारा बड़े जोर शोर से दिया था। इस समय इसका पालन भी भारत सरकार को राज्य सरकारों के साथ मिलकर करना चाहिए।


कहा कि उत्तराखंड के प्रवासीजो यहाँ पर रोजगार न मिल पाने के कारण देश के विभिन्न राज्यों एवं विदेश में रोजगार के लिए जाते हैं, यह सब लोग हर महीने अपनी पगार से उत्तराखंड में अपने परिवारों के लिए पैसा भेजते हैं। उत्तराखंड के प्रवासी भाइयों द्वारा भेजे गए इस पैसे से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र की आर्थिक गतिविधि संचालित होती है। कहा जा सकता है कि प्रवासी उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय क्षेत्र की आर्थिकी की रीढ़ है। यह सब लोग हैं तो गरीब लेकिन अलग-अलग किस्म के हुनर में माहिर है। इस हुनरमंद जमात को संकट से बाहर निकालना, इनकी रक्षा करना राज्य सरकार का दायित्व है। इसलिए उत्तराखंड के सभी प्रवासी भाईयों जो अल्प वेतनभोगी हैं, संसाधन विहीन है, जिनके पास अपने वर्तमान समय में रहने खाने की व्यवस्था नहीं है, जो आयकर दाता नहीं है, ऐसे सभी लोगों को उत्तराखंड सरकार अपने संसाधनों पर वापस घर लाने की व्यवस्था करनी चाहिए।


श्री बिष्ट ने यह भी कहा कि इस सम्बंध में वे दो पत्र मुख्यमंत्री को पूर्व में भेज चुके हैं लेकिन मुख्यमंत्री  तथा उनकी सरकार द्वारा इस विषय पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया जाना चिंता का विषय है। कोरोना से जीतना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी राज्य के प्रवासियों की रक्षा करना भी है। श्री बिष्ट ने राज्यपाल से आग्रह किया कि देश के विभिन्न राज्यों में फंसे हुए उत्तराखंडियों को सरकार के संसाधनों पर घर वापस लाने के लिए राज्य सरकार को निर्देशित करने का कष्ट करें, ताकि प्रवासी उत्तराखंडियों की सुरक्षित वापसी करवाकर उनके जीवन की रक्षा की जा सके।


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