कविता

 



      मां


     सुशीला रोहिला,  सोनीपत (हरियाणा)


ममता की किरण माँ 
शिशु का पहला क्र॔दन
माँ सृष्टि का आधार 
माँ ममता की मुरत


माँ ध्वनि का स्पंदन 
माँ चाँद की शीतलता
माँ सुर्य की है लालिमा
माँ तारों की है चमक


माँ देती है उमर -भर
लेती ना कभी कण -भर
माँ झोली ममता भरी
आशीवादों की लगती झड़ी  


माँ ज्ञान दात्री भाग्य विधाता
मदालसा स्वावलंबी की सीख
माँ सीता माँ दुर्गा माँ महामाया
माँ वन्दनीय है माँ पुजनीय है   
माँ की हम सब करें  सेवा


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