अनमोल शब्द


🔴सुशीला रोहिला


अन्तरजगत से लेकर 


बारह की पीड़ा को हरते


स्वयं संकटों को सह कर


दीन दुखियों की लाचार


बेबस हारे थके श्रमिक 


राहगीर का सारथी बनते


ऐसे केवल सद्गुरु देव होते।


 


करुणानिधि करुणासागर 


ज्ञानदात्ता मानवता के रक्षक 


राष्ट्र सेवा ही उनका सर्वोपरि धर्म 


महामारी में भी निर्बल का है बल


तन मन धन से सेवा में है समर्पित 


सद्सन्तानों ,माताओं का भरपूर


राष्ट्र सेवा में हुआ है समर्पण 


 


आओ सभी प्रेमी जन दूआ करें हम


गुरुदेव हमारे का बढ़े स्वास्थ्य धन


दिव्य परिवार हो चिरजीव हमारा 


 जगतमाता के चरणों में है वन्दन


 दर्श परस सेवा की मिले छाया 


 हे प्रभु! कोरोना महामारी से 


विश्व हो मुक्त हमारा ,


विश्व गुरु भारत प्यारा


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