कविता

 


     योगविद्या 


    सुशीलारोहिला, सोनीपत हरियाणा 


 


 योग भारत की पुरातन विद्या 


 विश्व भर में होता बखान 


 योग तन को स्वस्थ बनाता


 साधना से मन होए स्वच्छ 


 


पंतजलि ऋषि थे भारत के लाल


योग विद्या का गुरु कहलाया 


पद्चिह्नों पर है उनके जमाना 


 बाबा रामदेव योग के है धनी


योग विद्या का देते है ज्ञान 


योग का परचम विश्व में फहराया


भारत माँ का गौरव बढ़ाया 


 


 21 जून 2014 का सवेरा 


विश्व में योग सवेरा लाया


मोदी जी का हुआ शुमागमन 


यु एस का है भवन 


मोदी जी की वाणी, विश्व ने है मानी


योग विद्या का सब ले अटल खजाना ।


 


कथनी-करनी का है कमाल 


अंतर्राष्ट्रीय भारत योग दिवस महान 


सबने है माना ,विश्व ने पहचान 


योग ही निरोगता का 


 सुखद खजाना  


बच्चे- बूढ़े, जवान योग करें 


रहे सब निहाल


 


 अध्यात्म योग का है साधन


  बाँके बिहारी का है कहना 


  हर जगह हूँ मौजूद मैं 


पर मैं नजर आता नहीं 


योग- साधन के बिना 


 मुझे कोई पाता नहीं 


 


 


  योग का साधन 


   मैंने सद्गुरु श्री हंस से जाना


  तत्वदर्शी बन, सत्य को पहचाना


   सत चित्त आनंद में ध्यान लगाया


    ब्रह्म तत्व का आनंद पाया ।


 


      उनका कहना घट में है ईश्वर प्यारा


       घट में ही जानो भाई 


       प्राणों में है समाया 


       परा विद्या है योग की जननी 


       सब इसको जानो प्राणी 


        मन का रोग मिटे कैसे 


        मन का संग हो आत्मा से


       योग मिटाये तन का रोग


        साधना से मिटे मन का रोग


         जीव ईश्वर में समाए


         आनंद का है यह अमिट खजाना ।


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