कविता


 धर्मयुद्धवीर


 सुशीलारोहिला


धर्मयुद्ध छलयुद्ध पर पड़े भारी


कुरूक्षेत्र या फिर गलवान घाटी


धर्मयुद्ध की नीति शैतानों पर भारी


कराची पाक हो या चीन नेपाली


 


शांति की भाषा भारत बोलता


पूरे विश्व को अपना कुटुंब मानता


पहले हम किसी को ना छेड़ते


छेड़ते जो हमें फिर कसर ना छोड़ते


 


सीना जोश से छप्पन ईंच तनता


बड़े -बड़े शैतानों का दिल दहलता


भारत के वीर बड़े है सेनानी है


भालु बन्दर भी धीर वीर सेनानी है


 


भारत के धर्मबल की गौरव गाथा


का इतिहास सदियों पुराना है


 गौरे काले अंग्रेजों ने जाना है


हिटलर सिकंदर ने गाया है


 


चेतावनी !


चीन हो कराची छल युद्ध छोड़ो


मानव होकर मानवता को सीखो


हक दूसरों का तुम खाना छोड़ो


मानव होकर मानवता को सीखो


सबकी मातृभूमि का सम्मान करो


सद्भावना का प्रकाश चित्त में फैलाओ


मानवता का दीप हर मानव जलाओ


टिप्पणियाँ