गीत


श्रावण की मस्ती 


श्रावण का आना,वनों का बहकाना,


घटाओं का शोर,मयूर का नृत्य


दामिनी की चमक,अम्बर का दिवस,


बूंदों की रिमझिम,नक्षत्र का संगीत


चातक की प्रीत संग नक्षत्र की है बूँदl


भोले की जयकार,सावन की है पहचान,


कावड़ियों की चली बारात,गंगा का स्नान


पुण्य बड़ा महान,सजी-धजी कावड़,


चली भोले के द्वार।


मयूर का नृत्य,कोयल का गीत,


भँवरे की गुंजन,फूलों की मादकता


बागों की है बहार,श्रावण की है मस्ती,


खेतों की हरियाली,किसानों की खुशहालीl


पेड़ों पर झूले,तीज का त्योहार,


बेटी की पहली तीज,मायके की रीति


साजन की याद,श्रावण की प्रीत,


गोरी का झूलना,पिया बढ़ाए पींगl


मेंढक की टर्र-टर्र,पूड़ी सवाली के पकवान,


घेवर सावन का मिष्ठान।


हरियाणा की हरियाली तीज,


खेतों में बो गई बीजll


सुशीला रोहिला, सोनीपत 


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