कविता

 भारत रत्न अटल


                                     


 न टलने वाला सदा 


अटल रहने वाला ऐसा 


है अटल आत्म विश्वास 


भर-पूर देश-प्रेम में अटल 


 


स्वतंत्रता की क्रांति में  


फूँक दिया अपना स्वर 


 विरासत में कविता कर्म 


 वाणी में था अदभुत स्वर 


 


 तेरह दिन का बना राजा


 विपक्ष में बड़ा हंगामा 


 अटल का विश्वास कर्म 


 की पूजा ही स्वाभिमान 


 


कर्म की सत्यता से 


 ले आए कमल राज 


सुरक्षित राष्ट्र का भविष्य 


 खिला है कमल आज 


 


यमराज से भी लड़े 


भारतमाता की खातिर   


 लड़ेगा मौत से अटल 


पर्व आजादी की खातिर 


 


 परचम फहराऊंगा मै अपने 


 देश की खातिर परचम झुकने


 न दूंगा रूकने न दूंगा राष्ट्र की खातिर 


 


   गमगीन आखें है सबकी 


  भारत माता का लाल


  न्याय सदाचार का पाठ -


  पढाया सबको किया निहाल


 


 सादगी की प्रतिभा का था


 धनी भारत रत्न अटल 


 राष्ट्र का देश भक्त है लाल



                                                  (लेखिका) 


चरणों में वन्दन करे 


सब मिल भारतमाता में 


फिर हो ऐसे लाल 


फरिश्ता बने भारतमाता 


 का हर नर - नार 


 जय हिन्द जय भारत ।



  • सुशीला रोहिला, सोनीपत 


टिप्पणियाँ