श्री सतपाल जी महाराज के जन्म दिवस पर विशेष

      


       


   कलिंगावतार सद्भावना पहचान 


        🔵 सुशीला रोहिला ,सोनीपत 


 


        21 सितम्बर 1951की शुभ घड़ी


        एक नया सवेरा लाई अपने संग


        एक दिव्य छवि का कर आगमन  


        श्री हंस महाराज हुए प्रफुल्लित 


        श्री राजराजेश्वरी माँ है हर्षित 


 


       धरती  नाँचे अम्बर नाँचे नाँचे


       वन उपवन खगेश दिनेश महेश


       नाँचे -नाँचे सुरसरि धारा नदियाँ 


       नाँचे हिमगिरी नाँचे -नाँचे प्रेमीगण


 


        शीश पगड़ी मस्तक है चंदन टीका


        गले में है रूद्राक्ष माला ,तन में पहने


        पीताम्वरी पीठ पर हस्तजड़ित दुशाला 


        तर्जनि मणि जड़ित मुद्रिका है शोभित


 


       वेद शास्त्र रामायण गीता का है इशारा


       धर्म को बचाने हेतु होता मेरा अवतारा


       कलियुग की महानता का राज बताते


       नाम के आधार से मानव भवपार होते


 


       सतयुग त्रेता द्वापर में अमर तत्व जनाया


       कलियुग में सद्गुरु का क्रियात्मक ज्ञान 


       हर क्रिया की प्रतिक्रिया का भेद जनाया


       मोक्ष का सहज सुलभ सद्मार्ग बतलाया


 


      मैत्रयी अवतार का लक्ष्य विश्व गुरु हो 


     भारत माता कुर्सी पर है उनका सिंहासन 


      सद्भावना के संधान से मानव चित जगाना


      एक राष्ट्र एक ध्वज एक आत्मा है नारा ।


 


      


       


 


 


 


 


      


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