पर्व और त्यौहार भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा


स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने दी अहोई अष्टमी व्रत की शुभकामनाएं 


एसकेविरमानी / ऋषिकेश, 8 नवम्बर।* परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी जिसे अहोई अष्टमी कहा जाता है का आध्यात्मिक महत्व बताते हुये कहा कि अहोई अष्टमी का व्रत मातायें अपनी संतान के उत्तम स्वास्थ्य, कल्याण एवं दीर्घायु के लिये करती हैं।


पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि पर्व और त्यौहार भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं। भारत में प्रत्येक पर्व का आध्यात्मिक महत्व के साथ पर्यावरणीय महत्व भी है। बच्चों को भारतीय संस्कारों से जोड़ना और घरों में भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाये रखना जरूरी है। साथ ही पर्वों के वास्तविक महत्व को समझना और उस संदेश को आगे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना उससे भी अधिक आवश्यक है।


पूज्य स्वामी जी ने कहा कि बच्चों के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन के लिये प्रकृति और पर्यावरण को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखना नितांत आवश्यक है इसलिये पर्यावरण सुरक्षा की मुहिम में स्वंय भी जुड़े और बच्चों को भी जोड़े। पर्यावरण की सुरक्षा के लिये विशेषकर वयस्क बच्चे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


पूज्य स्वामी जी ने कहा कि बच्चों को बचपन से ही सिखाना होगा कि पर्यावरण के साथ हमारा संबंध सहयोग पर आधारित होना चाहिये और दृढ़ता के साथ इसका पालन किया जाना चाहिये।


पूज्य स्वामी जी ने कहा कि बच्चों की प्रथम पाठशाला उनका अपना घर होता है अगर परिवार के सदस्य प्राकृतिक संसाधनों का न्यायसंगत इस्तेमाल करेंगे तो ही बच्चे इसके प्रति संवेदनशील होंगे इसलिये यह ध्यान रखना होगा कि पर्यावरण संतुलन बना रहे तथा वर्तमान और भविष्य में आने वाली सभी पीढ़ियों कोे एक समान रूप प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करने का अवसर मिलता रहे। आगे आने वाली पीढ़ियों को भी भरपूर प्राकृतिक संसाधन और शुद्ध वातावरण प्राप्त हो सके।


हम यह कोशिश करें कि हमारे पूर्वजों और वर्तमान पीढ़ी को जितना शुद्ध वातावरण मिला हुआ हैं वैसा ही भविष्य की पीढ़ियों को भी प्राप्त हो सके। अगर वर्तमान पीढ़ी प्राकृतिक संसाधनों का उपभोग अपनी जरूरतों से कहीं अधिक करेगी तो जल, जंगल, जमीन और वायु जैसे प्रकृति प्रदत उपहारों की विरासत आगे आने वाली पीढ़ी के लिये उनकी जरूरत के हिसाब से नहीं बचेगी इसलिये आज अहोई अष्टमी के अवसर पर मातायें संकल्प लें कि अपने बच्चों को नैसर्गिक जीवन जीने के लिये प्रेरित करेंगी ताकि वे पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करेंगे।


 


 


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