एम्स में आईएएमएम का 17 वां वार्षिक सम्मेलन कल


एम्स निदेशक प्रो रविकांत 
एसके विरमानी / देहरादून। एम्स ऋषिकेश के निदेशक और सीईओ पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत के मार्गदर्शन व डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता की देखरेख में इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट (आईएएमएम) उत्तराखंड व यूपी का 17 वां वार्षिक सम्मेलन ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, एम्स ऋषिकेश में 23 मार्च, मंगलवार को आयोजित किया जाएगा।  

आयोजन समिति की अध्यक्ष माइक्रोबाॅयोलोजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर प्रतिमा गुप्ता और सचिव एडिशनल प्रोफेसर डाॅ. बलरामजी ओमर ने बताया कि इस एकेडमिक कार्यक्रम के आयोजन में माइक्रोबाॅयोलॉजी विभाग के चिकित्सकों की टीम भी प्रतिभाग करेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान महामारी परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम को (ई-सम्मेलन) के माध्यम से संपन्न कराया जाएगा। कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न संस्थानों से जुड़े वैज्ञानिक ज्ञान, विचारों को साझा करने के साथ-साथ संक्रामक बीमारियों के निदान में नई तकनीकों पर चर्चा कर अपने अनुभव साझा करेंगे। बताया गया कि यह कार्यक्रम माइक्रोबायोलॉजी के क्षेत्र में विशेष लाभदायक सिद्ध होगा जिसे वर्तमान समय में कोविड जैसी संक्रामक बीमारी पर केंद्रित किया गया है, साथ ही कार्यशाला में तपेदिक जैसी अन्य संक्रामक बीमारियों पर भी विस्तृत चर्चा होगी। आयोजन सचिव डा. बलरामजी ओमर ने बताया कि कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध संकाय विशेषज्ञ प्रोफेसर पल्लब रे, अध्यक्ष इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ की डा. ज्योत्सना अग्रवाल, आरएमएल लखनऊ से डा. जॉन एंटनी जूड प्रकाश, सीएमसी वेल्लोर से डा. उर्वशी द्वारा किया जाएगा। जबकि एम्स ऋषिकेश से डा. बी. सिंह और डा. गीता नेगी शिरकत करेंगी। वि​​​भिन्न सत्रों में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में भारत में एक्यूट इंसेफेलाइटिस जैसे वैज्ञानिक कारणों जिनमें बदलते परिदृश्य, जल और वायु के जीवाणु विज्ञान, तपेदिक के नियंत्रण में नैदानिक चुनौतियां और दुविधाएं, उभरते संक्रमण और महामारी में आईडीएसपी की भूमिका तथा इसके महत्व पर विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। 



कार्यशाला में उद्घाटन सत्र, पोस्टर सत्र, पुरस्कार सत्र के अलावा स्मारिका का विमोचन भी होगा। इसके बाद माइक्रोबायोलॉजी में (प्वाइंट ऑफ केयर टेस्ट) की भूमिका और प्रासंगिकता पर ब्रेन स्टॉर्मिंग पैनल चर्चा होगी। सभी नवोदित माइक्रोबायोलॉजिस्ट के लिए माइक्रो मेनिया क्विज- 2021 प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। इस सम्मेलन से उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों में स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रमों के लिए बेहतर रणनीति तैयार करने का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा। 

इस आयोजन में पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ से मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी के सभी विषयों के विशेषज्ञ, एम्स नई दिल्ली सीएमसी, वेल्लोरय आईएमएस, बीएचयू, वाराणसी, आरएमएल लखनऊ आरएमएल व बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर आदि स्थानों से वैज्ञानिक कार्यक्रम में प्रतिभाग करेंगे तथा महामारी विज्ञान के क्षेत्र में रोगाणुओं, निदान, प्रबंधन की बढ़ती चिंताओं के बारे में भी अनुभव साझा करेंगे


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