नहीं टाल सका उत्तराखंड अपनी नियति को

 

राज्यपाल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा सौपते त्रिवेन्द्र रावत 








चार साल के जश्न से पहले त्रिवेन्द्र ने सीएम की कुर्सी छोड़ी 

@ नरेश रोहिला 

उत्तराखंड अपनी नियति को टाल नहीं सका और एक बार फिर वही हुआ जिसके कयास लगाए जा रहे थे। चार साल का कार्यकाल पूरा होने से ठीक 9 दिन पहले मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अब जबकि वर्तमान भाजपा सरकार का एक वर्ष रह गया और और अगले साल विधानसभा चुनाव होना है, मुख्यमंत्री के तौर पर एक नया चेहरा जनता सामने आयेगा। जो कुछ भी राजनीतिक घटनाक्रम हुआ उसका अंदेशा गत 6 मार्च को उसी समय लग गया था जब अचानक गैरसैंण में चल रहे विधानसभा सत्र को स्थगित किये जाने के बाद मुख्यमंत्री नई दिल्ली जा पहुंचे और देहरादून में केंद्र के पर्यवेक्षकों के साथ कोर ग्रुप की बैठक हुई। कोर ग्रुप की बैठक लेने केंद्र के पर्यवेक्षक छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत देहरादून आये थे। इसी से यह संकेत मिलने लगे थे कि उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर कुछ बडा होने वाला है। 

सोमवार को हालांकि मुख्यमंत्री फिर दिल्ली में थे लेकिन जैसे उनकी मुलाकात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और दूसरे नेताओं के साथ बडे विलंब से हुई, उससे भी यही माना गया कि सब कुछ ठीक ठाक नहीं है। बहरहाल चुनावी वर्ष में भाजपा को यदि उत्तराखंड में मुख्यमंत्री बदलने का कदम उठाना पडा है तो कहीं न कहीं कोई बडी बात जरूर होगी। संभवतः पार्टी आलाकमान ने महसूस किया हो कि वर्तमान नेतृत्व के चलते 2022 का विधानसभा चुनाव जीतने में कोई मुश्किल न आ जाये। माना यह भी जा रहा है कि मुख्यमंत्री को बदलने का कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि त्रिवेन्द्र रावत की सरकार और संगठन के बीच तालमेल नहीं बैठ रहा था। बहरहाल जो भी स्थितियां रही लेकिन यह सच है कि हर बार बीच कार्यकाल में मुख्यमंत्री को बदलने की उत्तराखंड की नियति बन गयी है। खासकर भाजपा की सरकारों में तो यह शुरू से रहा है। 9 नवम्बर सन 2000 को उत्तराखण्ड का गठन हुआ। भाजपा के नेतृत्व वाली अन्तरिम सरकार बनी जिसके मुख्यमंत्री डा. नित्यानंद स्वामी बनाये गये लेकिन दो साल  बाद 2002 में होने वाले राज्य के पहले विधानसभा चुनाव से पहले ही उन्हें हटाकर भगत सिंह कोश्यारी को मुख्यमंत्री बना दिया गया । सन 2002 में भाजपा चुनाव हार गयी और कांग्रेस ने बहुमत से सरकार बनायी। कांग्रेस सरकार में वरिष्ठ नेता नारायण दत्त तिवारी को पार्टी आलाकमान ने मुख्यमंत्री बनाया। उनके समय में कांग्रेस के भीतर भी खटपट चलती रही लेकिन उत्तराखंड के अभी तक के राजनीतिक इतिहास में नारायण दत्त तिवारी ही ऐसे मुख्यमंत्री रहे जिन्होंने पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया। 2007 में प्रदेश की जनता ने भाजपा को सत्ता सौंपी तो पहले भुवन चंद्र खंडूरी मुख्यमंत्री बने और बाद में डाॅ रमेश पोखरियाल निशंक। 2012 का चुनाव आया तो उससे पहले फिर भाजपा के लिए खंडूरी जरूरी हो गये। उन्हीं के नेतृत्व में चुनाव लडा गया गया लेकिन जनता ने इस चुनाव में फिर प्रदेश की कमान कांग्रेस को दे दी। विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनाया गया। लगा था कि वे नारायण दत्त तिवारी की तरह पूरे पांच वर्षों तक सरकार चलाएंगे लेकिन बीच में ही उन्हें हटाकर हरीश रावत को कमान सौंपी गयी। हरीश रावत के समय ही दर्जन भर से अधिक विधायक भाजपा में चले गये। 2017 के चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल किया । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम के इर्द-गिर्द लडे गये इस चुनाव में भाजपा ने 70 सीटों वाली विधानसभा में सबसे अधिक 57 सीटें जीती। आरएसएस के करीबी त्रिवेन्द्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री की कमान सौंपी गयी। आगामी 18 मार्च को '' सरकार के चार साल '' का जश्न मनाने की तैयारी चल रही थी। कोर ग्रुप की बैठक को लेकर इसी तैयारी का हवाला दिया गया लेकिन नियति को शायद फिर इतिहास दोहराना था मुख्यमंत्री बदलने का इतिहास।

अपने इस्तीफे के बाद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने चार साल तक बतौर मुख्यमंत्री राज्य की सेवा करने का मौका देने के लिए भाजपा आलाकमान का आभार व्यक्त किया है। त्रिवेन्द्र रावत ने कहा कहा कि एक साधारण परिवार से निकल कर वह जिस ऊंचाई पर पहुंचे, वह भाजपा की ही बदौलत संभव हो सका। अब पार्टी ने उन्हें किसी और जनता की सेवा करने का मौका देने को कहा है। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने चार साल में राज्य के विकास के अनेक कदम उठाए।

कल होगी विधानमंडल दल की बैठक और नये नेता का चयन

नये मुख्यमंत्री के चयन के लिए कल देहरादून में भाजपा विधानमंडल दल की बैठक हो गयी।  सूत्रों के अनुसार इसके लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमनसिंह देहरादून आ रहे हैं। इसी बैठक में त्रिवेन्द्र सिंह रावत नये नेता के नाम का प्रस्ताव रखेंगे। 

मुख्यमंत्री की रेस में कई नाम 

उत्तराखंड के नये मुख्यमंत्री के लिए भाजपा में कई नाम चल रहे हैं। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत,पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के साथ ही केंद्रीय मंत्री डाॅ रमेश पोखरियाल निशंक और राज्य सभा सदस्य अनिल बलूनी के नाम की चर्चा जोरों पर है। 

गवर्नर ने त्याग पत्र स्वीकार किया, नयी सरकार के गठन त्रिवेन्द्र शासन का काम देखते रहेंगे


इस बीच राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने मुख्यमंत्री पद से त्रिवेन्द्र रावत और उनकी कैबिनेट का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया और उन्हें आदेश दिया कि नयी सरकार के गठन तक शासन का कार्य यथावत देखते रहेंगे। प्रदेश के मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने जारी की गयी अधिसूचना में यह जानकारी दी। 

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