हैल्थ, हैप्पीनैस और होलीनेस का संगम ही जीवन का आधार :साध्वी भगवती सरस्वती


एसके विरमानी/  ऋषिकेश। भारतीय भेषज संहिता ( फार्माकोपिया कमीशन), यूनाइटेड स्टेट फार्माकोपिया, नेशनल चेम्बर ऑफ फार्मास्यूटिकल, मैन्युफैक्चरर्स आफ श्रीलंका, इंडियन ड्रग्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, वर्ल्ड बुक ऑफ रिकाडॅ्स, लंदन के संयुक्त तत्वावधान में आज देहरादून के एक होटल में  हेल्थ एंड वैलनेस कान्क्लेव किया गया।

 हेल्थ एण्ड वैलनेस कान्क्लेव का शुभारम्भ दीप प्रज्जवलित करके किया जिसमें डिवाइन शक्ति फाउंडेशन की अध्यक्ष डा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने प्रमुख अतिथि के रूप में सहभाग किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री उत्तराखंड सरकार श्री गणेश जोशी , श्री अतुल नासा , डा राजीव रघुवंशी, वल्र्ड बुक ऑफ रिकाडॅ्स के डा सुकुल , श्री डारा पटेल, डा मृनाल जयंत  का वीडियो संदेश, सीमा डेंटल काॅलेज के निदेशक डाॅ हिमांशु एरन जी, डा रचना और अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों ने सहभाग कर प्रेरक उद्बोधन दिया।



 उद्घाटन समारोह के पश्चात श्री सचिन गांधी  ने डीडीएपी डाक्यूमेंट्री, दून एनिमल वेलफेयर डाक्यूमेंट्री एवं पैनल डिस्कशन किया। वल्र्ड बुक ऑफ़ रिकाडॅ्स के प्रतिनिधि डा सुकुल  ने साध्वी भगवती सरस्वती को मानवता और अध्यात्म के क्षेत्र में अद्भुत कार्यो के लिये विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया।

  डा साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि मैं बहुत प्रसन्न हूँ की आज का यह हैल्थ कार्यक्रम वर्ल्ड हैप्पीनैस डे के अवसर पर आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहने से तात्पर्य केवल शरीर के स्वास्थ्य से ही नहीं है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से भी है इसलिये हमें शरीर के साथ मन, मस्तिष्क और दिल से भी स्वस्थ रहना है। साध्वी जी ने कहा कि हैल्थ, हैप्पीनैस और होलीनेस (आध्यात्मिकता) का संगम ही जीवन है। अपने जीवन में अध्यात्म, दैवीय अनुग्रह और दिव्यता का अनुभव करना प्रसन्नता का आधार है। जीवन में हैल्थ, हैप्पीनैस और होलीनेस इन तीनों का होना नितांत आवश्यक है। तनाव जो है वह अस्वस्थता का प्रमुख आधार है। हम तामसिक भोजन ग्रहण करते है उससे भी तनाव उत्पन्न होता है।



 साध्वी जी ने कहा कि हम जो चाहते है वह नहीं होता तो हम तनाव में रहते है। परिस्थितियों के हिसाब से हमारे अन्दर की स्थिति में परिवर्तन होता है जिससे तनाव उत्पन्न होता है इसका सबसे अच्छा समाधान यही है कि हम सभी स्थितियों को स्वीकार करना सीख लें तो जीवन में प्रसन्नता; हैप्पीनैस अपने आप आ जायेगी। हमारे अन्दर हर परिस्थतियों को स्वीकार करने का भाव आ जायेगा तो जीवन से तनाव कम होगा और हम स्वस्थ और प्रसन्न रहेगें। 

साध्वी जी ने कहा कि जीवन में गहरी प्रसन्नता अध्यात्म के मार्ग पर चलने से आती है। उन्होंने अमेरिका के विश्व विद्यालय में हुई रिसर्च के आधार पर समझाया की किस प्रकार जीवन में अध्यात्म होने पर जीवन स्वस्थ और प्रसन्न .रहता है। प्रसन्न रहने से हमारा प्रतिरक्षा तंत्र भी मजबूत होगा। स्वस्थ और प्रसन्न रहने का सबसे बड़ा आधार है हमारी धरती माँ। धरती स्वच्छ, वायु और जल शुद्ध तो हम भी स्वस्थ और प्रसन्नचित रह सकते है। कोविड-19 ने हमें बताया कि अगर हमारा पर्यावरण स्वच्छ है तो हम स्वस्थ है। 

इस अवसर पर आयातित और निर्मित दवाओं की बिक्री, स्टॉक वितरण के साथ, दवाओं की पहचान, गुणवत्ता, शुद्धता तथा क्षमता को ध्यान में रखते हुए उनके निर्माण एवं बिक्री के लिये मानक तय करना। फार्मास्यूटिकल पदार्थों के फार्मूले तथा उनके निर्माण की विधियों पर भी चर्चा हुई। 

देश और दुनिया में मानव तथा प्राणियों के स्वास्थ्य के लिये आवश्यक दवाओं का प्रमाणीकरण तथा दवाओं की गुणवत्ता को बनाये रखने, दवाईयों का परीक्षण एवं शुद्धता की जाँच हेतु चर्चा की गयी।



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