ऋषिकेश में अन्तरराष्ट्रीय योग महोत्सव


 दूसरे दिन साधकों ने विभिन्न योग क्रियाओं का अभ्यास किया

  एसके विरमानी / मुनि की रेती (ऋशिकेश)।  गढवाल मण्डल विकास निगम एवं पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अन्तरराष्ट्रीय  योग महोत्सव के दूसरे दिन गंगा रिसोर्ट ऋषिकेश में योगाचार्यों द्वारा योग साधकों को विभिन्न योग क्रियाओं का अभ्यास कराया गया। 

मुख्य पांडाल में सुबह के सत्र में ग्रांड मास्टर अक्षर ने योग एवं प्राणायाम के अभ्यास कराये। उन्होनें धनुर आसन के बारे में बताते हुये कहा कि यह एक बहुत लाभदायक आसन है जिसके अभ्यास करने से शरीर शक्तिशाली होने के साथ-साथ लचीला हो जाता है।



उन्होंने दण्डासान, नौकासान व हिमालय प्रणाम का अभ्यास कराया। हिमालय प्रणाम आसन के बारे में बातते हुये उन्होने कहा कि इसका अभ्यास करने से शरीर में ऊर्जा का सचांर होता है एवं प्रसन्नता के भाव आते है। उन्होंने कहा कि प्राणायाम से हम अपने मन को शान्त करते है एवं जितने भी मेंटल डिसओडर है उन्हें प्रणायाम व आसन से दूर किया जा सकता है और शरीर में रोग-प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। 

 पंचकर्मा हाॅल में योगाचार्या कपिल सघंवी ने सुबह के सत्र का प्रारम्भ प्रणायाम से करते हुये कहा कि प्राण वायु द्वारा प्राण की पुष्टि होती है। जितना गहरा और दीर्घ सांस लेते एवं छोडते है उतना ही अधिक मन शांत  रहता है और अधिक ऊर्जा का उत्पादन होता है। उन्होंने कहा कि यह शरीर पंच तत्वों से मिलकर बना है जिसमें पृथ्वी तत्व हमें भोजन से प्राप्त होता है, जल तत्व माँ गंगा से प्राप्त होता है एवं अग्नि हमें सूर्य से प्राप्त होती है जबकि आकाष तत्व खुले आकाश से प्राप्त होता है। प्राण वायु को हम भली प्रकार से अवषोशित करेगें तो हम उतने ही स्वस्थ और ऊर्जावान बने रहेगें। 



 दूसरी ओर दोपहर के सत्र में मुख्य पंडाल में आर्ट आफ लीविंग के श्री श्री रवि शंकर ने आनलाइन माध्यम से योग साधकों को सम्बोधित करते हुये कहा कि आर्ट आफ लीविंग जीवन जीने की कला का एक सिद्धांत है। उन्होंने कहा कि योगा मेडिटेशन से व्यक्ति में ग्रहण करने की षक्ति का विकास होता है। उन्होंने कहा कि मन पर जोर जबरदस्ती नहीं करनी चाहिये। मन को ढीला-ढाला छोडना चाहिये। इससे धारणा बनती है व धारणा से ध्यान व ध्यान से समाधि की ओर जाना चाहिये।

 उन्होंने कहा कि मन की एकाग्रता से विकृतियां दूर होती है और विकृतियां दूर होने से व्यक्ति का चरित्र सकारात्मक रूप से बदल जाता है। उन्होने कहा कि हर अपराधी के भीतर कोई पीडित व्यक्ति मदद के लिये पुकार रहा होता है। दोपहर बाद मुख्य पांडाल मे गौर गोपाल दास ़द्वारा प्रतिभागियों को आनलाइन सम्बोघित कर योग के महत्व के बारे मे बताया गया।

 वहीं गंगा रिसोर्ट में विभिन्न विभागों द्वारा अपने उत्पादों के स्टाल लगाये गये है जिसमें उद्योग विभाग , आयुश विभाग प्रमुख रूप से शामिल हैं। अध्यात्म विज्ञान व सत्संग केन्द्र जोधपुर द्वारा सिद्ध योग के माध्यम से प्रतिभागियों व आगन्तुकों को ध्यान लगाने के क्रिया का अभ्यास कराया जा रहा है। गढ़वाल मण्डल विकास निगम द्वारा गढ़वाली व्यंजनों का स्टाल लगाया गया है जिसमें गढ़वाली व्यंजन बुरांश चाट, कुलथ अनार सोरबा, गहत चाट, कंडाली सोरबा, राजमा गलावटी कबाब, मंडुवा समोसा चाट, बुरांश पकोडे, बुरांश जैली, ब्राऊन राईस पुडिंग, देहरादूनी पुडिंग आदि परोसे जा रहे हैै। योग महोत्सव के दूसरे दिन सांयकालीन सत्र में पं0 रजनीश व रितेश मिश्रा ने मुख्य पंडाल में सास्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से शाननदार प्रस्तुति दी।

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