मेरी बात

 कोरोना संक्रमित पत्रकार और हैल्थ किट

@ नरेश रोहिला 

गर आप पत्रकार हैं और गलती से भी कोरोना से संक्रमित हो गये हैं तो उपचार के लिए सरकार, सूचना और स्वस्थ्य विभाग के भरोसे न रहे। अपने उपचार की व्यवस्था खुद ही कर लें। होम आइसोलेशन में पत्रकारों को जो हेल्थ किट भिजवाई जा रही है उसे देखकर तो हम तो यही कहने लिए मजबूर हैं।

पत्रकार को भेजी गयी कोरोना हैल्थ किट 





दो दिन पहले राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त  एक पत्रकार एसके विरमानी की रिपोर्ट पाजीटिव आ गयी। इसके बाद उन्होंने सूचना विभाग के नोडल अधिकारी को फोन  पर इसकी सूचना दी। इसलिए कि शासन द्वारा पत्रकारों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए प्रदेश स्तर और  जिलास्तर पर नोडल अधिकारी बनाएं  गएं है और पत्रकारों से कोरोना पाजीटिव होने या लक्षण होने पर उसकी सूचना नोडल अधिकारी को देने का आग्रह किया गया है। 

कोरोना संक्रमण से पीड़ित पत्रकार एसके विरमानी 


 








एसके विरमानी की सूचना का  नोडल अधिकारी ने गम्भीरता से संज्ञान लेते उसे कार्रवाई के लिए अग्रसारित कर दिया और आश्वासन दिया कि कल सुबह तक आइसोलेट मरीजों को दी जाने वाली किट उनके आवास पर पहुंच जायेगी। श्री विरमानी के अनुसार इसके बाद अगले दिन क्षेत्र की आशा कार्यकत्री का फोन उनके पास आया। आशा कार्यकत्री ने कहा कि उसकी तबीयत भी थोड़ी खराब है और सेंटर पर किट भी नहीं है इसलिए वे कल कोरोना हैल्थ किट भिजवा देंगी। आशा कार्यकत्री ने यह भी कहा कि यदि उन्हें जल्दी है तो वह स्वास्थ्य सेंटर पर पता कर लें।

प्रिस्क्रिप्शन में लिखी दवाईयां 





श्री विरमानी के अनुसार इसके बाद उनका  एक स्टाफ स्वास्थ्य सेंटर गया तो पता चला कि वहां तैनात कर्मचारी ही मौजूद नही है।वह काफी देर इंतजार के बाद लौट आया। इसके बाद आज सुबह कोरोना पाजीटिव श्री विरमानी को हैल्थ किट मिली। हैल्थ किट को देखकर श्री विरमानी ने अपना माथा पीट लिया कि इसके लिए उन्होंने दो दिन तक इंतजार किया। पत्रकार के अनुसार किट में दो तीन दवाईयों के अलावा एक छोटा सैनिटाइजर और दो मास्क भर है। तीन दवाईयों पर तो क्रास का निशान लगा है। मतलब कि ये दवाई उपलब्ध ही नही है। किट में आक्सीमीटर और भांप लेने की मशीन तो क्या होगी, बुखार मापने के लिए एक अदद थर्मामीटर तक नहीं है। उस पर तुर्रा यह कि इसी किट के लिए  प्रशासन और स्वस्थ्य विभाग दिनरात एक किए हुए हैं  जिसका कुल वास्तविक मूल्य जोडें तो शायद रूपए 100  भी न हो। 

सवाल यह है कि कोरोना ने जिस तरह से कोहराम मचाया हुआ है। रोजाना हजारों केस राज्य में आ रहे है। लोगों की मौत रही है और लोगों को अस्पतालों में बेड, और जरूरी सुविधाएं  नहीं मिल रही है। इसी कारण हल्के लक्षणों वाले मरीजों को होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी जा रही हैं। लेकिन देख सकते हैं कि होम आइसोलेशन में जब पत्रकारों को ही आधी अधूरी हैल्थ किट दी जा रही है। सवाल यह भी है जब पत्रकारों, जो कोरोना योद्धा के रूप मे अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं और शासन- प्रशासन की गतिविधियों, उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की सूचना आम जनता तक अपने अखबार, टीवी और पोर्टल के माध्यम से पहुंचा रहे हैं  की स्थिति यह है तो आम मरीजों की हालत क्या होगी। यह  वास्तव सोचनीय है कि इसी तरह से कोरोना की सुनामी बन चुकी दूसरी लहर से मुकाबला किया जा सकेगा ? मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को जरूर इस पर ध्यान देना चाहिए? 

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