मृत्यु भोज जैसी कुप्रथा को समाप्त करने के लिए रोहिला क्षत्रिय विकास परिषद की पहल

राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ धर्म पाल रोहिला 

राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ धर्म पाल रोहिला ने कहा, तेरहवीं पर सहभोज का आयोजन बंद करें

एक रूपया देकर रस्म पगड़ी परम्परा निभाएं

सगे-संबंधियों को मिलाई, मिठाई डिब्बे भी देनें बचें

नरेश रोहिला / सहारनपुर। अखिल भारतीय रोहिला क्षत्रिय विकास परिषद ने  मरणोपरांत मृत्यु भोज जैसी कुप्रथा के निवारण की पहल करते हुए समाज के लोगों से इस पर रोक लगाने का आह्वान किया है। 

परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ धर्म पाल रोहिला ने बताया कि परिषद की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रस्ताव पारित करते हुए मरणोपरांत मृत्यु भोज आदि कुरीतियों को समाज से दूर करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

 इस बारे में राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ धर्म पाल रोहिला, महामंत्री कुलदीप रोहिला और कोषाध्यक्ष सुभाष रोहिला द्वारा संयुक्त हस्ताक्षर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि बैठक में तय किया गया कि मरणोपरांत होने वाली तेरहवीं की रस्म पर सहभोज आयोजित न किया जाए। सिर्फ बाहर से आने वाले आतिथियों के लिए ही भोजन बनवाया जाए। समाज के स्थानीय लोग घर से भोजन करके ही श्रद्धांजलि सभा में आएं।

यह भी निर्णय लिया गया कि रस्म पगड़ी पर जिनका अधिकार बनता है वे सभी मात्र एक रूपया देकर परम्परा का निर्वहन करें। तेरहवीं पर अपने सगे संबंधियों को मिलाई अथवा टीका न दें। मिलाई अथवा टीका किसी शुभ अवसर पर ही शोभा देता है। इसके साथ ही तेरहवी रस्म समापन पर किसी मिष्ठान का डिब्बा, पैकेट भाजी न न दी जाए। 

 राष्ट्रीय अध्यक्ष अध्यक्ष डॉ धर्म पाल रोहिला ने परिषद की सभी नगर, ब्लाक, जनपद और प्रांतीय शाखाओं से आह्वान किया कि अपने अपने स्तर बैठक आयोजित करके और समाज के लोगों से संपर्क करके इस निर्णय से अवगत करा दें ताकि इस कुरीति को समाज से दूर किया जा सके।

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